माता-पिता द्वारा सही परवरिश नही करने पर बच्चों पर बुरा प्रभाव :-
आजकल की इस भागदौड़ के जीवन में माता-पिता अपने बच्चों पर ध्यान सही तरीके से नहीं दे पाते जिससे बच्चे सही संस्कार, विनम्रता, समर्पण, जिम्मेदारी, कर्तव्य, संवेदनशील आदि कई बातों का ज्ञान व मतलब नहीं समझ पाते हैं| जिससे बच्चों को ज्ञान नहीं होता है कि इन बातों को जानकर अपने जीवन में अपनाकर अपना जीवन उज्जवल कर सकते हैं | इसी प्रकार माता-पिता सही परवरिश और संस्कार नहीं देने पर बच्चों का जीवन खराब हो जाता है और बच्चे गलत रास्ते पर चले जाते हैं क्योंकि माता-पिता सही और गलत का फर्क नहीं बता पाते जब बच्चे कोई गलत कार्य या कोई कार्य नहीं करने पर उन्हें डांटना, आलोचना करना, पीटना इस तरीके से व्यवहार करने पर बच्चे आप से दूर और आपसी संबंधों में कड़वाहट आ जाती है| जिस प्रकार आप बच्चों की परवरिश व संस्कार के साथ बड़ा करते हैं वैसे बच्चे व्यवहार करते हैं| इस प्रकार बच्चों में ऐसे गुण आ जाते हैं| जैसी परवरिश आप बच्चों की करते हैं उसका फल वृद्ध अवस्था में आपको मिलता है कि कितना वह आपका साथ देते हैं जो नीचे बताए गए हैं|
1. Poor Social Skills ( खराब सामाजिक कौशल ) :-
बच्चों की खराब माता-पिता के कारण परवरिश सही नहीं हो पाती है| जिससे उनका जीवन खराब हो जाता है| बच्चों में सामाजिक कौशल खत्म हो जाता है | जिससे बच्चा सामाजिक नियम व कायदे नहीं समझ पाते है| जिससे समाज में अपना विकास नहीं कर पाते वह समझ नहीं पाते कि समाज वह महत्वपूर्ण माध्यम हैं जो उनके जीवन को उत्कृष्ट बनाता है क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों को सामाजिक कौशल के बारे में नहीं बता पाते जिससे वह सामाजिक कौशल का विकास नहीं कर पाते इसीलिए उनका Social Skills खराब हो जाती है|
2. Unreliable (अविश्वसनीय):-
जब माता-पिता बच्चों को बचपन में विश्वास करना या विश्वास किस पर या चीज पर विश्वास करना चाहिए या नहीं यदि आप बच्चों का विश्वास बार-बार तोड़ते हैं तो इससे उनमें अविश्वास की भावना उत्पन्न हो जाती है |जिससे बच्चे अविश्वसनीय हो जाते हैं इसलिए उनका विश्वास मजबूत बनाए रखें|
3. Careless(लापरवाह) :-
जब आप अपने बच्चे के प्रति बचपन से लापरवाह करते हैं तो बच्चे बड़े होकर अपने माता- पिता के प्रति लापरवाह हो जाते हैं क्योंकि आपने उन्हें यह नहीं सिखाया कि देखभाल कैसे की जाती है| इसलिए Care क्या होता है| वह समझ नहीं पाते है| इसीलिए उनके लिए आपका महत्व कुछ नहीं होता हैं|
4. Argumentative (विवादपूर्ण):-
जब आप बचपन से ही उन्हें सही तौर तरीके नहीं सीखात हैं उन्हें किसी भी बात व कार्य के लिए संतुष्ट नहीं कर पाते हैं| आप बच्चो को वह चाहते है| वह कार्य नहीं करने देते या मना कर देते हैं| जिससे बच्चे आपसे छोटी-छोटी बातों में विवाद करने लग जाते हैं उनका व्यवहार विवादपूर्ण हो जाता है जो जीवन भर ऐसा रहता है|
5. Rigid (कठोर) :-
जब माता-पिता बच्चों को बचपन से कठोरता से पालन करते हैं| हर छोटी-छोटी बात व कार्य में कठोरता से व्यवहार करते हैं| जिससे उनके व्यवहार में कठोरता आ जाती है| जब आप वृद्धावस्था में होगे तो आप की स्थिति केसी भी हो वह आपके प्रति कठोर हो जाते है वह संवेदनशील के गुण को सिख नहीं पाते है| दूसरों के प्रति संवेदनशील नहीं हो पाते हैं|
6. Rude (अशिष्ट):-
जब माता-पिता अपने बच्चों को बचपन से सभ्यता का पाठ नहीं सिखाते हैं तो बच्चे असभ्य या अशिष्ट हो जाते हैं| जिससे वह नहीं समझ पाते है| सभ्यता क्या होती है| जिससे दूसरों के सामने आपसे सभ्यता से बात करता हैं और बोलता है वह कुछ भी अशब्द का प्रयोग करता है छोटा हो या बड़ा किसी का भी सम्मान नहीं करता है| किस समय कैसा रहना चाहिए, सही तरीके से व्यवहार नहीं करना आदि जिससे उनका व्यवहार असभ्य हो जाता है|
7. Indiscipline (अनुशासनहीनता):-
जब माता-पिता बच्चों को बचपन से अनुशासन नहीं सिखाते हैं| जैसे सही समय पर सोना, पढ़ना, सुबह जल्दी उठना , किसी नियम को मानना जब इस तरह की परवरिश नहीं की जाती है तो बच्चों में अनुशासनहीनता का गुण आ जाता है| जिससे बच्चे कोई नियम और कायदे नहीं मानते और उनके लिए अनुशासन कोई मायने नहीं रखता है|
8. Antisocial Behavior ( असामाजिक व्यवहार):-
जब बच्चों की सही प्रकार से परवरिश नहीं होती है तो उसे बच्चों में असामाजिक व्यवहार करने लगते हैं| जिससे बच्चे समाज में अपना व्यवहार उच्च नहीं बना पाते हैं| क्योंकि मैं शुरू से सामाजिक व्यवहार के बारे में नहीं बताया जाता है|
9. Loner ( अविवाहित):-
जब बच्चों को माता- पिता द्वारा सही परवरिश नहीं मिलती है और माता-पिता का व्यवहार व संबंध अच्छा नहीं होता है और विवाह करना क्यों जरूरी है यह नहीं बताया जाता है तो संस्कार, जिम्मेदारी, कर्तव्य आदि का ऐहसास नहीं कराया जाता जिससे बच्चे बड़े होकर गलत रास्ते पर, गलत चीजों, गलत आदतें दुष्ट व्यवहार हो जाते हैं| जिससे समाज में उनकी प्रतिष्ठा सही नहीं हो ने पर उनका विवाह नहीं हो पाता है| जिसे वह अविवाहित रह जाते हैं|
10. Pessimistic ( निराशावादी):-
जब बच्चों को बचपन से किसी भी कार्य व क्षेत्र में कुछ करना चाहते हैं तो उसे मना किया जाता है कि तुमसे नहीं हो पाएगा यह कह -कह कर उसके मन में निराशा की भावना भर देते हैं| जिससे वह निराशावादी हो जाता है क्योंकि उसके माइंड में यह बेट जाता है कि वह नहीं कर सकता है| जिससे अपना ग्रोथ नहीं कर पाता हैं|
11. Self -defeating thoughts( स्वयं पराजित विचार):-
सही माता-पिता नहीं बनने पर और परवरिश व संस्कार सही नहीं दे पाते जिससे बच्चों में आत्मा पराजित विचार आ जाते हैं| जिससे किसी कार्य, बात व क्षेत्र में कुछ करने में बच्चों को अपने आप पर विश्वास नहीं होता है| यह कार्य में कर सकता हूँ| क्योंकि उन्हें बचपन से स्वयं कुछ नहीं कर सकते यह विचार उनके मन में पराजित के होते हैं|
12. Secretive (गुप्त):-
जब माता-पिता अपने बच्चों के साथ फ्रेंडली नहीं होते हैं| जिससे वह आप पर विश्वास नहीं करता है| जिससे यदि कोई ऐसी बातें, कोई समस्या हो, उसके जीवन से जुड़ी बात, निर्णय आपसे छुपाता है या बताता नहीं है| बच्चे सिक्योरिटी हो जाते हैं|
13. Fear of Failure( असफलता का डर):-
जब बच्चों को बचपन से ग्रोथ व सक्सेस की बातें व कहानी नहीं सुनाई जाती जिससे वह जान नहीं पाते कि वह भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं ऐसी परवरिश नहीं मिलती है तो बच्चों में असफलता का डर उनके मन में बैठ जाता है और जीवन में कुछ नहीं कर पाते हैं और सही निर्णय नहीं ले पाता है|
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अच्छे माता-पिता नहीं बन पाने के कारण आप अपने बच्चों का जीवन खराब कर सकते हैं जिससे बच्चों में ऊपर बताएं गई सारी बातें आ जाती है जिससे उनका जीवन निरस्त हो जाते हैं और अच्छे परिवार का निर्माण नहीं हो पाता है इसलिए तो भगवत गीता में कृष्ण ने कहा है
माता-पिता का महान चिह्न है कि वे अपने बच्चे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं जब कोई नहीं देख रहा हो
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्ततदेवेतते जन:
जैसे-जैसे फादर कहेगा ✖ वैसे-वैसे बच्चा नहीं करेगा ✖
जैसे-जैसे फादर करेगा ✔ वैसे-वैसे बच्चा अपने आप करेगा ✔
माता-पिता अपने बच्चो की परवरिश ऐसे करे
यदि आप एक अच्छे माता-पिता बनना चाहते हैं तो 3F याद रखें अपने बच्चों के लिए जो आपके और बच्चे के संबंध को मजबूत बनाता है
1. Firm :-
आप अपने बच्चों के साथ दृढ़ रही यदि कोई बात या कार्य है तो उस बात के लिए अपने निर्णय पर दृढ़ रहिए जो काम की बातें हैं उस पर टिके रहिए
2. Fair :-
आप अपने बच्चों को बिना कारण या जबरदस्ती सजा मत दीजिए कोई कार्य और बात करता है यदि छोटी मोटी गलती हो जाती है तो बात को पहले समझे व जानिए उसके बाद सजा दीजिए बिना कारण सजा मत दो
3. Failure :-
यदि कभी बच्चों को सजा भी देनी पड़ जाए तो उनका आपके साथ फ्रेंडली व्यवहार बना रहे
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